परिवार ,समाज और देश संविधान और कानून से नहीं बल्कि लोक लज्जा से भी चलता है 

परिवार ,समाज और देश संविधान और कानून से नहीं बल्कि लोक लज्जा से भी चलता है 

 विचार अभिव्यक्ति  :-संतोष सिंह स्टेट हेड ,कशिश न्यूज 
    परिवार ,समाज और देश संविधान और कानून से नहीं चलता है लोक लज्जा से चलता है ,और जिस समाज में लोग लज्जा समाप्त हो जाता है  तो फिर ना तो लोगों में परिवार के बड़ों के प्रति सम्मान रहता है ना कानून का भय रहता है और ऐसे में धीरे धीरे पूरे समाज में अराजकता फैलने लगती है ।
मुझे लगता है इस वक्त हम लोग इसी दौर से गुजर रहे हैं बिहार में 24 घंटे के अंदर  एक दर्जन से अधिक हत्या और बलात्कार की घटना घटी है इसमें दो  ऐसी घटना है जो पूरे बिहार को हिला कर रख दिया है।एक कल देर शाम पटना एयरपोर्ट पर तैनात इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन हेड रूपेश सिंह की हत्या हलाकि मेरा इनसे कोई परिचय नहीं रहा है लेकिन कल जब इस घटना के बाद जिस किसी से भी बात किये हर कोई स्तब्ध था।
रुपेश अरे इतना व्यवहारिक लड़का था कैसे इसके साथ हो सकता है  पटना एयरपोर्ट पर आम यात्री हो या फिर खास यात्री हर किसी के साथ ये खड़ा रहता था।
इसकी लोकप्रियता इसी के आकी जा सकती है कि घटना की सूचना के बाद इनके घर लोगों का ताता लगा हुआ है और हर किसी के जुवान पर यही था रुपेश का किसी से दुश्मनी भी हो सकती है ऐसा सोच भी नहीं सकते हैं और अगर कोई बात था भी तो ऐसी क्या स्थिति बनी कि रुपेश जैसा लड़का उसको सँभाल नहीं सका ।
दूसरी घटना मधुबनी कि है जहां एक गूंगी लड़की के साथ आठ लड़को ने गैंग रेप किया और फिर उसकी पहचान ना कर ले इसके लिए उन दरींदो ने लड़की का दोनों आंखे फोड़ दिया ।
इस पशुता को क्या कहा कहेगे निर्भया की घटना के बाद इतना कठोर कानून बनाया गया लेकिन उस कानून के लागू होने के बाद बलात्कार जैसी घटना कम हो गयी ।
इस तरह कि घटना क्या दर्शाता है हमारे समाज में लड़कियों को लेकर जो लोक लज्जा था वो अब खत्म हो गया है उसी तरीके से अपराध करना गलत है इसको लेकर समाज में जो एक लोक लज्जा था धीरे धीरे अब वो भी खत्म हो गया है ।
पैसा होना चाहिए चाहे आप बलात्कारी हो ,हत्यारा हो, लूटेरा हो समाज और सिस्टम को इससे कोई मतलब नहीं है और यही वजह है कि सब कुछ धीरे धीरे पटरी पर उतरती चली जा रही है ।
कल सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून को लेकर जो कमेटी बनायी है कमिटी में जैसे लोगों को जगह दी गयी है वो क्या दर्शाता है कि सिस्टम के सर्वोच्च पद पर बैठे लोगों में भी अब लोक लज्जा खत्म हो चुकी है।
अभी तो लोग आनंद ले रहे हैं चलो सुप्रीम कोर्ट किसान को बता दिया लेकिन इसका प्रभाव आने वाले समय में कितना बड़ा दिखेगा शायद इसकी समझ सुप्रीम कोर्ट में बैठे जज साहब को नहीं है।

परिवार ,समाज और देश संविधान और कानून से नहीं बल्कि लोक लज्जा से भी चलता है