सत्ता के गलियारे से लेकर ब्यूरोक्रेसी के किचन तक रुपेश की पहुंच थी 

सत्ता के गलियारे से लेकर ब्यूरोक्रेसी के किचन तक रुपेश की पहुंच थी 

 विचार अभिव्यक्ति  :-संतोष सिंह स्टेट हेड ,कशिश न्यूज 
   इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन मैनेजर रूपेश सिंह की हत्या मामले में कल देर शाम के बाद पुलिस की जांच एक ऐसे मोड़ पर आकर ठहर गयी है जहां से बहुत कुछ निकलने की उम्मीद नहीं है।
                मतलब इस केस का भी  हश्र बांबी हत्याकांड, शिल्पी गौतम हत्याकांड की तरह ही अनसुलक्षी रह जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। भेल ही पहली बार बिहार के किसी हत्या मामले में सीएम की तरफ से प्रेस रिलीज जारी किया गया है जिसमें हत्यारा को पकड़ने का निर्देश है और इस मामले में डीजीपी से बात होने कि बात कही गयी है ।
                                           यह रिलीज ही बहुत कुछ कह रह है कि यह कोई साधारण हत्या नहीं है और इस हत्या से राजनीति गलियारा,ब्यूरोक्रेसी और न्यायपालिका स्तब्ध है ।लेकिन रुपेश की हत्या का तार भी इन्हीं तीनों गलियारे हो कर गुजर रहा है ये भी साफ दिख रहा है।
                             क्यों कि इस हत्या के पीछे जो भी है उसे पता है कि रुपेश की हत्या के बाद उसके चाहने वाले किसी भी हद तक जा सकते हैं और चाहने वालों की सूची पर गौर करे तो बिहार का कौन सी ऐसी बड़ी शख्सियत नहीं है जो इनके करीब ना हो।
        फिर भी रुपेश की हत्या हो जाती है मतलब रुपेश के हत्यारा को बचाने वाला भी रुपेश की तरह है कोई ना कोई हाई प्रोफाइल लोग ही है  जिन्हें इतना गुरुर जरुर है कि पुलिस मेरे पास नहीं पहुंच सकती है चाहे पुलिस कितनी भी सबूत क्यों ना जुटा ले ।
1--सत्ता के गलियारे से लेकर ब्यूरोक्रेसी के किचन तक था रुपेश की पहुंच थी 
   जी है पटना एयरपोर्ट मतलब रुपेश सिंह कोई भी समस्या हो समाधान इनके पास रहता था आम से लेकर खास लोग इनका सहयोग रोजाना लेते रहते थे ।
इनका स्वभाव और काम करने की शैली इतना प्रभावी था कि पटना एयरपोर्ट से सफर करने वाले हर कोई रूपेश का मुरुद था।
              कोई भी काम हो रुपेश के लिए चुटकी बचाने जैसा था ।हलांकि पिछले दो तीन वर्षों के दौरान इसकी हैसियत इतनी बढ़ गयी थी कि बिहार में हाल के दिनों में जो भी बड़े टेंडर हुए हैं जिसमें राज्य के बाहर की कंपनी शामिल रही है उस टेंडर मैनेज करने में  रुपेश की बड़ी भूमिका रही है।
        ऐसा ही एक टेंडर उत्तर बिहार से जुड़ा हुआ है जिसको लेकर कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है सरकार पेशोपेश में है सब कुछ कागज पर ही हो गया है। कहां ये जा रहा है कि उस टेंडर में रुपेश की बड़ी भूमिका रही है हलाकि इस मामले में रुपेश की हत्या हो जायेगी ये समझ से पड़े है  क्यों कि रुपेश इस टेंडर में सिर्फ बिचौलिये की भूमिका था। डील आमने सामने हुई थी फिर भी एक तात्कालिक कारण हो सकता है क्यों कि उस टेंडर को लेकर उत्तर बिहार के कई बड़े ठेकेदार काफी लांबिंग कर रहे थे ।
   रुपेश के रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है इस बार के विधानसभा चुनाव में इनके आग्रह पर बिहार के सभी बड़े दलों ने चार पांच लोगों को विधानसभा का टिकट दिया है ।
हलाकि रुपेश को जानने वालों का यह भी कहना है कि लड़की इसकी कमजोरी रही है हो सकता है कुछ ऐसी घटना हुई हो जिस वजह से प्रतिशोध में इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया हो।
                                 वैसे पुलिस अधिकारी जिनको अपराध की समझ है उनका भी मानना है कि अधिकांश मामलों में ये देखा गया है कि इस तरह की हत्या के पीछे अवैध रिश्ता वजह रही है।
                     पुलिस इन बिंदुओं पर भी जांच कर रही है हलाकि इस मामले में जो बाते सामने आ रही है यहां भी मामला हाई प्रोफाइल ही है क्यों कि एयरपोर्ट एक ऐसी जगह है जहां हाई प्रोफाइल लोगों से रिश्ते बनने की संभावना अधिक रहती है और इस तरह के खेल में बड़े खिलाड़ी ही शामिल होते हैं इसलिए अगर ये मामला है तो फिर पटना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल होगा उद्भेदन करना क्यों कि उसकी कड़ी भी ऊपर तक जुड़ी हुई है । 
       2--- रुपेश को हत्या का अंदेशा था --
     रुपेश के साथ जो घटना घटी है उसका अंदेशा उसे पहले से ही था उनके कई करीबी मित्रों का कहना है कि पिछले दो तीन माह से वो कुछ खोया खोया सा रहता था ,ऐसे ऐसे शायरी वो शेयर करता था जिससे लगता था कि ये अंदर से बहुत घबराया हुआ है लेकिन कभी किसी को खुल कर नहीं बोला कि उसकी परेशानी क्या है।
                 फिर भी उसके बातचीत और चेहरे के भाव से तनाव में है ये साफ महसूस हो रहा था हलाकि इसके कई करीबी मित्र इसको लेकर लगातार सवाल कर रहे थे लेकिन रुपेश खुल कर कुछ भी नहीं बोल रहा था। ऐसे में मित्रों ने ही रुपेश को सलाह दिया कि कोरोना के कारण सब लोग मानसिक रुप से परेशान रहा है ऐसे में कही परिवार के साथ पटना से बाहर घूमने निकल जाओं
                                 गोवा मित्रों की सलाह पर ही गया था और वहां से लौटते ही इनके साथ यह घटना घट गयी । हालांकि रूपेश का मोबाइल ही काफी है इस मामले के उद्भेदन के लिए ।लेकिन जिस तरीके से इस हत्याकांड में हाई प्रोफाइल लोगों के शामिल होने कि बात सामने आ रही है ऐसे में बहुत मुश्किल है पटना पुलिस को काम करना ।
                                                वैसे उपेन्द्र शर्मा की जो कार्यशैली रही है उसमें ये इस तरह के मामले में अभी तक समझौतावादी नहीं रहे हैं गलत लोगों को जेल भेजने को कभी तैयार नहीं होते है चाहे मामले के उद्भेदन में जीतना भी वक्त लग जाये  हैं ।
                    हलाकि इस बार परिस्थिति बदली हुई है सरकार के साख का सवाल है मीडिया इस खबर को प्रमुखता से चला रही है ऐसे में पटना पुलिस काफी दबाव में है देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन ये तय है पुलिस सही दिशा में आगे बढ़ गयी तो बिहार की राजनीति में भूचाल आ जायेगा

सत्ता के गलियारे से लेकर ब्यूरोक्रेसी के किचन तक रुपेश की पहुंच थी