कोरोना के खिलाफ योद्धा बने जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में दंपति

कोरोना संक्रमितों की खोजबीन,क्वारंटीन सेंटर में देखभाल और आइसोलेट किए गए लोगों के बीच कार्यरत कोरोना योद्धा दंपति 


               वैश्विक कोरोना महामारी से एक तरफ जहाँ पूरा विश्व आतंकित है वहीँ भारत में भी 50 दिनों से अधिक समय से लाकडाउन है I कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में इसके चलते लोग तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं I लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इससे बचाव के कार्यों में अपनी जान जोखिम में रखकर दिन रात हमारी सेवाओं में लगे हैं I 
               आज ऐसे हीं एक युगल योद्धा दंपति के संबंध में जानकारी दे रहे हैं जो जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में अपने कार्यों को बखूबी अंजाम दे रहे हैं I 
               जी हाँ हम बात कर रहे हैं विजय मोहन सिंह जो कि एक प्राइवेट आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और उनकी पत्नी ज्योति कुमारी जो पूर्वी सिंहभूम जिले के जुगसलाई प्रखण्ड के रूहीडीह में आयुष्मान भारत के तहत बने हेल्थ वेलनेस सेंटर में राष्ट्रीय स्वाथ्य मिशन के तहत समुदायिक स्वाथ्य पदाधिकारी हैं I 
                लॉकडाउन के इस विकट स्थिति में ज्योति कुमारी मानगो नगर निगम के सर्विलांस टीम में पदस्थापित हैं I हालाँकि ज्योति कुमारी को तो सरकारी आदेशानुसार ड्यूटी करना अनिवार्य है लेकिन इस स्थिति में उनके आयुर्वेदिक चिकित्सक पति विजय मोहन सिंह मानवीय रूप से इस महामारी में मानवता की सेवा करने के लिए अपनी पत्नी के कार्यों में न केवल हाँथ बटाते हैं अपितु इन्हें जहां भी कोई बीमार या भूखा दिखाई देता है वहां पहुंचकर बीना किसी फ़ीस के उसे देखते हैं I यहीं नहीं बल्कि जरुरत के अनुसार जहां तक संभव हो पीड़ित को मदद करते हैं I 
                 हालाँकि इसी वर्ष जनवरी में ही ये लोग यहां आयें हैं और यहां अपना एक छोटा सा अस्पताल खोलने के लिए कुछ पुंजी रखे थे लेकिन मानवीय पीड़ा को देखते हुए जरुरतमंदों के बीच पति पत्नी का पैसा खर्च हो रहा है I आज यह दंपति दूसरों को मदद करते हुए अब "हैंड टु माउथ " के पोजीशन में आ गया है I 
                जुगसलाई में सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी ज्योति कुमारी को सबसे पहले मानगो क्षेत्र में कोरोना वाईरस से संक्रमितों की तलाश की जिम्मेवारी मिली I घर घर जाकर संक्रमितों का हॉउस होल्ड सर्वे अपने टीम के लोगों से करवाना और प्रतिदिन का रिपोर्टिंग करना आसान काम नहीं है I घर से सुबह आठ बजे निकलकर दिनभर फिल्ड में काम करना देर शाम तक प्रतिदिन का रिपोर्ट तैयार कर दे देना बहुत बड़ी बात है I 
                 पिछले दो दिनों से ये दोनों पति-पत्नी जमशेदपुर के लोयला स्कूल में भेलौर से आने वाले का स्वाथ्य जांच करते हुए मानगो नगर निगम सर्विलांस टीम के साथ घूम रहे हैं I 
                 विजय मोहन सिंह वैशाली जिले के महुआ प्रखण्ड के सिंघाड़ा उत्तरी पंचायत के निवासी हैं I इससे पहले ये महुआ प्रखण्ड अस्पताल में लगभग दस वर्षों तक वोलैंटीयर से लेकर डब्लू.एच.ओ के पल्स पोलियों के सुपरवाइजर का कार्य किये हैं I कई वर्षों तक ये सबसे बेस्ट सुपरवाइजर रहे I 2005 में इनके अच्छे कार्य करने पर प्रखण्ड अस्पताल महुआ के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विनोद प्रसाद सिंह को पल्स पोलियों के ब्रांड एम्बेसडर क्रिकेटर रवि शास्त्री जी के द्वारा बैट और बॉल पर हस्ताक्षर कर दिया गया था
              विजय मोहन सिंह वैशाली जिले के महुआ प्रखण्ड के सिंघाड़ा बुजुर्ग गांव के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 18/01/1982 जन्म लिए I इनके पिता शिव शंकर प्रसाद सिंह एक फौजी थे जो अब रिटायर हो गए हैं और माता विमला देवी एक गृहिणी हैं I इनकी प्राथमिक शिक्षा गांव में हीं राज्यकीय मध्य विद्यालय में हुआ तथा उच्च विद्यालय की पढ़ाई जिला स्कुल मुजफ्फरपुर तत्पश्चात बारहवीं की पढाई महेश्वर प्रसाद साइंस कॉलेज मुजफ्फरपुर से हुआ I
              फिर ये हरिद्वार के ऋषिकुल कॉलेज से BAMS की पढ़ाई पूरा किये I इसके बाद ये बतौर ICU इंचार्ज ABC अस्पताल पानीपत ज्वांइन किये I इनका विवाह बचपन में ही इनके पिताजी ने अपने दोस्त की बेटी से करा दिया I इसी बीच इनकी पत्नी ने तीन बच्चों को जन्म दिया जिसमें दो लड़की और एक लड़का है I लेकिन इस बीच इनकी पत्नी के बच्चेदानी में कैंसर हो गया जिनका ईलाज के दौड़ान 2012 में हीं मृत्यु हो गया I 
              तीन साल बाद ABC अस्पताल पानीपत से ये रांची आये जहाँ अस्पताल खोलने के लिए नामकुम स्थित एक अस्पताल में अपना अनुभव लेने लगे I चुकि इनकी पहली पत्नी इस दुनिया से विदा हो चुकि थी और इनका जीवन एकांकी हो गया था तो इसी बीच इनकी मुलाकात रांची के हीं एक विघवा महिला जो दो बच्चों की मां थीं से हो गया I चुकि उसे भी सहारे की आवश्यकता थी और इन्हें भी एकांकी जीवन में साथी की जरुरत थी I ये दोनों हमउम्र तो थे लेकिन यहाँ अंतरजातीय विवाह की समस्या आयी और इनके परिवार और इनके समाज को स्वीकार्य नहीं था I लेकिन दोनों ने आपसी समझदारी और सुझबुझ से एक दुसरे के बारे में सबकुछ जानकार परिणय सूत्र में बंधने का निर्णय ले लिया और आपसी सहमती से शादी कर लिया I 
                इनकी पत्नी ज्योति कुमारी जो GNM के बाद BSc Nursing की हैं I इनका चयन राष्ट्रीय स्वाथ्य मिशन में चयन हुआ और झारखण्ड सरकार द्वारा समुदायिक स्वाथ्य पदाधिकारी का कोर्स कराकर इनकी पहली नियुक्ति रांची फिर सरायकेला और अब जमशेदपुर में समुदायिक स्वाथ्य पदाधिकारी के रूप में हुई है I दोनों के बच्चों को मिलाकर अब कुल पांच बच्चें इनके हैं I ये दोनों सभी बच्चों को समान रूप से देखते हैं और बच्चे भी इन्हें सामान रूप से प्यार करते हैं । 
 

कोरोना के खिलाफ योद्धा बने जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में दंपति