जो अरबो रूपए की लूट को अंजाम देकर देश से फुर्र हो गए

जो अरबो रूपए की लूट को अंजाम देकर देश से फुर्र हो गए

 

प्रधानमंत्री मोदी और विपक्षी नेता भी भूल गए इन भगौड़ों को...
जो अरबो रूपए की लूट को अंजाम देकर देश से फुर्र हो गए
नीरव मोदी टीम के पास थे बैंक के पासवर्ड, खुद ही जारी कर लेते थे एलओयू
मुकेश अंबानी के चचेरे भाई विपुल अंबानी से भी सीबीआई की पूछताछ जारी .
मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि में भगदड़, पाँच बड़े अफसरों का इस्तीफा
नई दिल्ली: पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11,000 करोड़ से ज्यादा के देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले की शुरुआती जांच में पता चला है कि नीरव मोदी की टीम बिना किसी रुकावट के बैंक के कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करती थी और खुद ही एलओयू जारी कर देती थी.पंजाब नेशनल बैंक ने पिछले बुधवार को खुलासा किया कि उसने 1.77 अरब डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपये) के घोटाले को पकड़ा है. इस मामले में अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी (46) ने कथित रूप से बैंक की मुंबई शाखा से फ़र्ज़ी गारंटी पत्र हासिल कर अन्य भारतीय बैंकों से विदेशी ऋण हासिल किया.
दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्‌टी, सीडब्ल्यूओ मनोज खरात और नीरव के अॉथराइज्ड सिग्नेटरी हेमंत भट्ट ने पूछताछ में सीबीआई को बताया है कि लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के लिए जरूरी सभी लॉग इन-पासवर्ड नीरव की टीम के पास थे.सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि स्विफ्ट सिस्टम में लॉग इन के लिए अकाउंट डिटेल और पासवर्ड नीरव की टीम के पास थे. उनके पास स्विफ्ट सिस्टम का पासवर्ड था, जो लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के लिए जरूरी है. नीरव के लाेग पीएनबी अधिकारी के तौर पर अवैध तरीके से स्विफ्ट सिस्टम में लॉग इन करते थे.
इस काम के लिए बैंक कर्मचारी और अधिकारियों को हर एलओयू पर कमीशन मिलता था. हर एलओयू और स्विफ्ट सिस्टम के अवैध एक्सेस पर प्रतिशत तय था. यह रकम घोटाले में शामिल कर्मचारियों के बीच बंटती थी. पूछताछ में करीब आधा दर्जन बैंक कर्मचारियों और अन्य बाहरी लोगों का हाथ भी घोटाले में सामने आया है.
गौरतलब है कि नीरव और मेहुल से जुड़ी 200 से ज्यादा फर्जी कंपनियां जांच के दायरे में हैं.पीएनबी बैंक के अलावा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक, यूको और एक्सिस बैंक की हांगकांग ब्रांच के अफ़सर भी जांच के घेरे में हैं. इन्हीं बैंकों ने पीएनबी के फर्जी एलओयू के आधार पर नीरव और मेहुल की कंपनी को कर्ज दिया था.जेम्स (हीरा) सेक्टर में एलओयू की समयसीमा 90 दिन है, लेकिन पीएनबी से ये 365 दिन के लिए जारी हुए थे.
हांगकांग में 11 भारतीय बैंकों की ब्रांच हैं. अभी तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 1,357 करोड़, यूनियन बैंक ने 1,920, यूको बैंक ने 2,635 और इलाहाबाद बैंक ने 2,000 करोड़ रुपए फंसे होने की जानकारी दी है.
जांच एजेंसी ने रविवार को सभी बैंकों से उनके यहां एलओयू में हुई गड़बड़ियों की रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों के अनुसार बहुत सारी एलओयू की समयसीमा मई 2018 तक है और इस स्थिति में घोटाले की रकम बढ़ने की भी आशंका है.टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि सीबीआई नीरव मोदी की कंपनी ‘फाइव स्टार डायमंड’ के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) विपुल अंबानी से भी पूछताछ कर रही है. विपुल मुकेश अंबानी के चचेरे भाई हैं.
सीबीआई पीएनबी के दो कर्मचारियों के अलावा पांच और भी बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर रही है, जिसमें जनरल मैनेजर स्तर के अधिकरी भी शामिल हैं. जांच के दायरे में आने वाले अब कुल 11 बैंक अधिकारी हो गए हैं.इस घोटाले के चलते सिर्फ बैंकिंग सेक्टर ही नहीं, बल्कि 24 कंपनी और 18 व्यापारी भी मुश्किल में पड़ गए हैं. इन व्यापारियों ने 2013 से 2017 के बीच मेहुल और नीरव की आभूषण कंपनी की शाखाएं खोली थीं. अब वे आर्थिक दिवालिएपन का शिकार हो गए हैं जिसके चलते नीरव और मेहुल की धोखेबाजी के खिलाफ उन्होंने आपराधिक मामले भी दर्ज कराए हैं.
कैसे करते थे घोटाला? क्या होता है स्विफ्ट मैसेज?
दरअसल, जांच एजेंसियों को गिरफ्तार किए गए पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुल शेट्टी के कंप्यूटर और सर्विस फाइल से कई बड़ी जानकारियां हाथ लगी हैं. पता चला है कि स्विफ्ट मैसेज विदेशी बैंकों को भेजते वक्त बदल दिए जाते थे.
मैसेज बदलने के बाद सारा खेल काबू 
में होता था. इसका मतलब हुआ कि.....
- मान लीजिए नीरव मोदी को विदेश में 50 करोड़ रूपए की पेमेंट करनी है.
- मिलीभगत होने की वजह से गोकुल शेट्टी ने स्विफ्ट सिस्टम में नीरव मोदी के नाम पर पचास करोड़ की जगह सिर्फ 5 लाख रूपए लोन की एंट्री की
- पैसे कम होने से जल्दी ही इसे अप्रूवल मिल जाता है
- फिर गोकुल शेट्टी अप्रूवल मैसेज में पांच लाख को बदलकर पचास करोड़ कर देता
- इसके बाद स्विफ्ट सिस्टम के जरिए ये मैसेज विदेश में मौजूद बैंक को भेज देता
- विदेश में मौजूद बैंक को अप्रूवल कोड के साथ पचास करोड़ का लोन दिखायी देता
- बैंक बिना किसी पूछताछ के पैसा नीरव मोदी को दे देता था
इस तरह स्विफ्ट मैसजों को बदलकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी लगातार की गयी, लेकिन गोकुल शेट्टी ने सिर्फ यहीं पर धोखेबाजी नहीं की बल्कि वो एक ही ब्रांच में आठ साल तक टिका रहा जो बहुत बड़ा शक पैदा कर रहा है.सूत्रों का कहना है कि इस मामले की जांच की आंच बैंक के आला प्रबंधन तक भी पहुंच सकती है क्योंकि सीवीसी की गाइड लाइन के मुताबिक एक अधिकारी को एक जगह पर तीन साल से ज्यादा तैनात नहीं किया जा सकता. आला प्रबंधन शक के घेरे में हैं क्योंकि गोकुल शेट्टी को एक ही ब्रांच में एक ही पद पर रखने वाला शख्स कौन था?
ये सवाल इसलिए क्योंकि गोकुलनाथ शेट्टी के लिए बगैर किसी मदद के इतना बड़ा घोटाला करना मुमकिन नहीं है. इसका खुलासा होना अभी बाकी है.
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मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि में भगदड़, 
CFO सहित 4 बड़े अधिकारियों का इस्तीफा
नई दिल्ली: 11,500 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में घिरी मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि में भगदड़ मच गई है. गीतांजलि जेम्स के सीएफओ और बोर्ड मेंबर समेत चार अफसरों ने इस्तीफा दे दिया है. इसमें गींताजली जेम्स के सीएफओ चंद्रकांत करकरे, कंपनी सेक्रेटरी एंड चीफ कम्पलांयश ऑफिसर पंखुरी और बोर्ड सदस्य कृष्णन संगमेस्वरन ने इस्तीफा दे दिया है. पीएनबी से नीरव मोदी ने 2000 करोड़ और मेहुल चोकसी ने 9000 करोड़ रुपये लिए थे. ये दोनों विदेशों से कच्चा हीरा आयात करते थे.
इस मामले में ईडी ने अबतक करोड़ों रुपये की कीमत के हीरे, स्वर्ण आभूषण और अन्य बेशकीमती रत्न जब्त किए हैं जबकि एजेंसी ने इस हफ्ते गीतांजलि जेम्स के प्रोमोटर और नीरव मोदी के रिश्तेदार मेहुल चोकसी को सम्मन भी दिया. सूत्रों ने बताया कि ईडी जांच को आगे ले जाने के लिए मोदी, चोकसी और उनके कारोबार से जुड़े निजी और आधिकारिक सभी प्रकार के वित्तीय दस्तावेजों को जुटाने का प्रयास कर रही है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘ ईडी की तरफ से 15 फरवरी को छापेमारी शुरू किए जाने के बाद से अबतक कई कंप्यूटर उपकरण, हार्ड ड्राइव और दस्तावेजों को जब्त किया जा चुका है.’’  मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईडी मोदी, चोकसी और घोटाले से जुड़े दूसरे लोगों की कम से कम दो दर्जन अचल संपत्ति कुर्क करने वाली है. ईडी और आयकर विभाग ने भारत और विदेश में करीब 200 मुखौटा कंपनियों को जांच के दायरे में ले लिया है जिनका प्रयोग कथित धोखाधड़ी के तहत धन प्राप्त करने या भेजने के लिए किया जाता था.
इस बात का संदेह है कि इन मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल आरोपी धन शोधन करने और जमीन, सोना और बेशकीमती रत्नों के रूप में ‘बेनामी’ संपत्ति खरीदने में कर रहे थे. आयकर विभाग अब इसकी जांच कर रहा है.
साभार :-पुर्नेंदु शुक्ला ,जर्नलिस्ट ,सदस्य सुप्रीम कोर्ट मोनिटरिंग कमिटी गैस पीड़ित के फेसबुक वाल से 

 

जो अरबो रूपए की लूट को अंजाम देकर देश से फुर्र हो गए