भोजपुर जिला और पुलिस प्रशासन माहवारी कमीशनखोरी के कारण बालू माफियाओं के कारोबार को देता है प्रोटेक्शन

भोजपुर जिला और पुलिस प्रशासन माहवारी कमीशनखोरी के कारण बालू माफियाओं के कारोबार को देता है प्रोटेक्शन 

             भोजपुर में बालू माफियाओं के कारण भोजपुर की आम जनता तबाह है I भोजपुर के तमाम मुख्य सड़क पर बालू माफियाओं के कारण अक्सर लोगों की जान जाती है I सड़क जाम की समस्याएं बराबर बनी रहती है I सड़क पर बालू गिरने के कारण लगातार सड़क दुर्घटना होने रहता है I नियमानुसार 30 जून से तीन माह के लिए सोन नद से बालू उत्खनन व प्रेषण पर रोक लगाई जाती है I लेकिन इसके बावजूद भी जिले में अवैध बालू की खनन और धुलाई धरल्ले से की जा रही है I सहार से लेकर कोईलवर तक यह अवैध खनन का खेल बिना जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के मिलीभगत से संभव नहीं है I जिलाधिकारी से लेकर पुलिस कप्तान तक को बालू माफियाओं द्वारा माहवारी कमीशन पहुँचाया जाता है I यह अतिरिक्त आमदनी का सुरक्षित जरिया जिसके कारण बालू माफियाओं के प्रति इनकी सहानुभूतिपूर्ण नजरियाँ को जन्म देता है I बालू क्षेत्र के थानेदार बालू माफियाओं को नजरअंदाज करते हैं क्योंकि उनको अपने वेतन से कई गुना रकम उनको मंथली बालू माफियाओं के द्वारा सुरक्षित मिल जाता है I 
          भोजपुर में जिस थाना क्षेत्र में जितना अधिक घांट है उस थाने की नीलामी का रकम उतना हीं अधिक होता है I जाहिर है जहाँ पांच से दस लाख देकर कोई थानेदार बनेगा तो कमसे कम इससे दुगुनी चर्गुनी वसूलेगा हीं I इसीतरह से भोजपुर पुलिस कप्तान बनने वालों को भी राज्य सरकार के ट्रांसफर पोस्टिंग एजेंट को दो करोड़ देकर हीं जिला की कप्तानी मिलती है I ऐसे में दो करोड़ देने वाला कम से कम दोगुना या चारगुना कमाएगा हीं I भोजपुर जिलाधिकारी बनने के लिए भी राज्य सरकार के ट्रांसफर पोस्टिंग एजेंट को दो करोड़ रकम अदा करने पड़ते हैं I ऐसे में दो करोड़ देने वाला कम से कम दोगुना या चारगुना कमाएगा हीं I
           बालू भंडारण करने की होड़ में बालू माफिया और उनके गुर्गों द्वारा एक-दूसरे को पीछे छोड़ते हुए सोन नद में अवैध उत्खनन कर पूरी नदी के बेड (नदी के बीच का हिस्सा) को खाली कर दिया जाता है। जिससे नद में सैकड़ों जगह 40 से 50 फीट के गड्ढे बन जाते हैं I ये गड्‌ढ़े नद के जलस्तर वृद्धि के साथ गड्ढे पानी से लबालब भर जाते हैं जिसमें फंसकर अक्सर किसी न किसी की भी जान जाती रही है I दिखावे के लिए खनन विभाग सोन नद में छापेमारी करता है I दरअसल ये कार्रवाई कमीशन की रकम बढ़ाने के लिए होता है I पुलिस प्रशासन भी कभी कभार दिखावे के लिए छापेमारी करता है जिसमें खानापूर्ति कर बाद में लीपापोती कर दी जाती है I 
            बालू माफियाओं को स्थानीय विधायक का भी समर्थन मिला हुआ है I सफेदपोश नेताओं मंत्रियों यहाँ तक कि मुख्यमंत्री तक की कुर्सी को भी बालू माफिया रसद कमीशन से सिंचित करते हैं I अगर ऐसा नहीं होता तो निश्चित रूप से दिखावटी कार्रवाई नहीं होता बल्कि अवैध खनन कारोबार कब का बंद हो गया होता I बालू माफियाओं को विधायकी का टिकट दे दिया जाता है I विधायकी का टिकट देने के लिए सत्ताधारी से लेकर विपक्ष दो करोड़ तक वसूल लेते हैं I
             बालू माफियाओ द्वारा महंगी कीमत पर बालू बेचा जाता है और सबको कमीशन पहुंचकर सबको खुश और सबको चुप करा दिया जाता है I सूत्रों की माने तो बालू के भंडारण में व्यवसायी एक अरब रुपये से ऊपर पैसे लगाकर बालू का भंडारण करते हैं I बालू उत्खनन करने वाले नाविकों के अनुसार एक नाव पर 1500 सीएफटी बालू लोड कर सारण में डोरीगंज घाट ले जाते हैं जहाँ से 1200 रुपये प्रति सीएफटी ट्रको पर बालू लोड किया जाता है। जबकि बालू कम्पनी ने भंडारण का रेट 100 सीएफटी के लिये 2500 रुपया तय किया है। जिसमे चालान राशि भी इंक्लूड है। लेकिन सूत्रों की माने तो बालू व्यवसायी भण्डारण बालू का रेट 3000 हजार रुपये निर्धारण किये हैं I  
             बालू माफियाओं को पालित ,पोषित और संरक्षित करने में उनके राजनीतिक आकाओं के अलावे सिविल और पुलिस प्रशासन की पूरी तरह से संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है I बिहार के पुलिस महानिदेशक नें भी इस सच्चाई हो स्वीकार किया है कि स्थानीय जिला प्रशासन स्थानीय पुलिस प्रशासन ,विधायक ,मंत्री खनन विभाग की मिलीभगत से यह अवैध खेल होता है I अकेला डीजीपी क्या कर सकते हैं जब सत्ताधारियों द्वारा यह संरक्षित है I 
 

भोजपुर जिला और पुलिस प्रशासन माहवारी कमीशनखोरी के कारण बालू माफियाओं के कारोबार को देता है प्रोटेक्शन