अपने जूनून और परिवार के सदस्यों के नैतिक समर्थन से सबल हो रही हैं रिंकी तिवारी

अपने जूनून और परिवार के सदस्यों के नैतिक समर्थन से सबल हो रही हैं रिंकी तिवारी 

मीडिया मंच संवाददाता जगन्नाथ दास की रिपोर्ट 
मीडिया मंच कटिहार बिहार:- महिलाएं आत्म निर्भर बनने की दिशा में अब आगे बढ़ रही हैं I एक समय था जब महिलाएं घर की चहारदीवारी से आगे निकलने में झिझक मह्सुश करती थी I अनेकानेक पाबंदियों की बेड़ियों में जकड़ी रहती थीं I महिलाएं घरेलू काम तक ही अपने आप को सीमित रखती थीं I हालाँकि श्रम के मामले में कभी भी महिलाएं पुरुष समाज से पीछे नहीं रहीं हैं I घर में चूल्हा-चौका, बर्तन-वासन, खाना बनाना, झाड़ू-पोछा करना, पशुओं की देखभाल, दूध से दही ज़माना और देशी पद्धति से पारंपरिक घी तैयार करना इत्यादि घरेलू कार्य कम नहीं है I घर की आर्थिक प्रगति में उनका श्रम का योगदान बहुत मायने रखता है I अब समय के बदलाव, माहौल परिवर्तन और अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुसार महिलाएं घर से बाहर निकलकर परिवार की आर्थिक तरक्की में भी अपना बहुमूल्य योगदान देने की दिशा में स्वेक्छा से आगे बढ़ रही हैं I महिलाओं के सशक्तिकरण के दिशा में उनकी आर्थिक गतिविधियाँ उन्हें सबल बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं I 
               कटिहार में ही जन्मी पली बढ़ी और केन्द्रीय विद्यालय कटिहार से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कर डी.एस कॉलेज कटिहार से स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण कर वैवाहिक बंधन में बंधकर घर परिवार की और अपने दो दो बच्चों की जिम्मेवारियों को बखूबी निर्वहन कर कटिहार की रिंकी तिवारी घरेलू स्तर पर मशाला उद्योग की शुरुआत कर चुकी हैं I इनकी शादी भी कटिहार शहर में ही हुई है इसलिए अपने सास-ससुर, ननद-देवर,जेठ-जेठानी  के संयुक्त परिवार की जिम्मेवारियों को बखूबी निर्वहन करते हुए संयुक्त परिवार के सदस्यों के सहयोग,सहमति  और अपने सास-ससुर के नैतिक समर्थन से मशाला उद्योग की शुरुआत कर चुकी हैं I स्थानीय मार्किट से कच्चा माल लेकर उसकी साफ सफाई कर शुद्धता की कसौटी और मानक के अनुसार मशाला तैयार कर खुद उसकी घर में पैकेजिंग कर उसकी डिमांड अनुसार खुद सप्लाई करती हैं I कच्चा माल लेकर उसे मिल में पिसवाकर लाती हैं और उसकी पैकेजिंग कर खुद मार्केटिंग करती हैं I 
                   कटिहार जिला जहाँ जूट उद्योग और अनेकों कल कारखाने थे आज उनके बंद हो जाने से वहां रोजगार की भयंकर समस्याएं खड़ी हैं I ऐसी स्थिति में एक घरेलू पढ़ी लिखी महिला घर की दहलीज से निकलने का साहस करती हैं और अपना मशाला उद्योग का उद्धम शीलता का परिचय देते हुए व्यापार करती है यह और महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बात है I सास-ससुर,जेठ-जेठानी और अपने पति तथा संयुक्त परिवार का अपने व्यवहार से दिल जीतकर उन्हें राजी कर अपने लिए आर्थिक उन्नति का मार्ग खोजना यह मामूली काबिले तारीफ बात नहीं है I 
                      बहरहाल रिंकी तिवारी अपने नाम से “रिंकी मशाला” प्रोडक्ट को स्थानीय बाजार में बेचती हैं I अपने अगल-बगल के पास-पड़ोस में बेचती हैं I बिहार सरकार को ऐसे संघर्षशील महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें बैंक ऋण एवं लघु उद्योग विभाग में घरेलू लघु इकाई के रूप में निबंधित कर आर्थिक अनुदान देकर प्रोत्साहित करने की जरुरत है I जिला उद्योग कटिहार और स्थानीय लीड बैंक के ब्रांच मैनेजर को ऐसे महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आना चाहिए इनकी समस्याओं का निदान कर प्रधानमंत्री के मिशन आत्म निर्भर भारत अभियान को गति प्रदान करना चाहिए I 

 

अपने जूनून और परिवार के सदस्यों के नैतिक समर्थन से सबल हो रही हैं रिंकी तिवारी