मानवीय गलतियों का नतीजा है प्राकृतीक आपदा :- ई० बिरेन्द्र कुमार सिंह

मानवीय गलतियों का नतीजा है प्राकृतीक आपदा :- ई० बिरेन्द्र कुमार सिंह


 
 मानव अहंकार से वसीभूत्त होकर इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा है कि विकास के नाम पर अब तक हम गलत रास्ते पर थे। ये आपदाएं इंसानी गलतियों का नतीजा है।हम पहले प्रकृति का नाश करते हैं,फिर दवा बनाते हैं जिन्हें बनाने वाले अकूत सम्पति बनाते हैं और गरीब महामारी में बर्वाद होते  हैं।बात केवल महामारी तक होती तो गनीमत थी।हमने बेहत्तर उत्पादन के नाप पर पारंपरिक कृषि को नष्ट किया।इससे जब मिट्टी खराब हुई तब हमने खाद बनाई।कृषि योग्य खेतों को जरूरत से ज्यादा ग्रीड के पोलो से छाँक दिया।पानी को प्रदूषित किया तो मिनरल वॉटर बनाया। हवा को प्रदूषित किया तो बिना प्रदूषण वाला सिलिण्डर में हवा बिकने लगा ।ये सब जो होता देख रहें हैं उसका अपराधी कोई और नहीं बल्कि मानव ही है।मानव का अहंकार से मुकरने का नतीजा केवल महामारी ही नहीं बल्कि पिघलते ग्लेशियर,विनाश कारी बाढ़ ,मरती नदियाँ है।महामारी से मिली सीख के बाद सभी को ठहरकर इस दौड़ का मूल्यांकन करना चाहिए। विकास जरुरी है,लेकिन किस किमत पर,हमें इस तथ्य को समझना चाहिए कि जिस रास्ते को हम  विकास पथ समझ बैठें हैं कही वह हहकारी का रास्ता तो नहीं?."
              साभार!
        ई० बिरेन्द्र कुमार सिंह
                 संयुक्त सचिव
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              पटना,बिहार-800004.

मानवीय गलतियों का नतीजा है प्राकृतीक आपदा :- ई० बिरेन्द्र कुमार सिंह