तूने कभी समझा ही नहीं मेरे छुपे प्यार को

तूने कभी समझा ही नहीं मेरे छुपे प्यार को

रचना:-बीवा चक्रवर्ती
तूने कभी समझा ही नहीं मेरे छुपे प्यार को तुमने तो बस लाइक करने की सोची।
मैंने तुम्हें अपने दिल से चाहा था बेजुबान मैं आपके मन का रहस्य समझ नहीं पाया। मैं जैसा हूँ वैसा ही सजाने की उम्मीद थी।
मैं आपको समझ नहीं पाया। असल में प्यार
शायद इस शब्द का अर्थ मेरे लिए अज्ञात था।
अब मुझे समझ में आया......
व-विचार अंतहीन हैं।
नीच-लालच शांतिपूर्ण है।
बा-वास्तविकता बहुत कठिन है।
सा-साधना के समय बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं।
प्यार के बारे में अब मैं इतना ही समझता हूँ।
पूरा टाई काल्पनिक है....
साभार :-https://www.facebook.com/biva.chakroborty.7

 

 

तूने कभी समझा ही नहीं मेरे छुपे प्यार को